Dua Shayari

आज दरगाह मे मन्नत का धागा नही,
अपना दिल बांध कर आया हूँ “तेरे लिये”

हजारों ऐब हैं मुझमें नहीं कोई हुनर बेशक,
तू मेरी हर कमी को खूबी में तब्दील कर देना,
एक खारे समंदर सी हस्ती है मेरी मौला,
तू अपनी रहमतों से इसे मीठी झील कर देना।

हाथों की लकीरें पढ़ते वक्त रो देता हूं मैं,
कि इनमें सब कुछ तो है तेरा नाम ही आखिर क्यों नहीं है।

मुद्दतें हो गयी हैं खता करते हुए,
शर्म आती है अब तो दुआ करते हुए.