Love Story in Hindi |Hindi Love Stories | बेस्ट लव स्टोरीज

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तुम आज भी मुझमे कही ज़िंदा हो – दर्द भरी कहानी

 

Hindi love stories

आँखें मूँद कर जब इस बारिश को महसूस करता हूँ…
तो ऐसा लगता है उसने मेरा हाथ थाम रखा है..
इस सन्नाटे में भी ऐसा लगता है वो मुझे बुला रही है.

मेरा नाम अज़हर जाहिद(काल्पनिक नाम) है. मुझसे ज़िन्दगी में सिंर्फ एक गलती हो गयी कि मैंने हिन्दू लड़की से प्यार कर लिया, उसका नाम दिव्या(काल्पनिक नाम)था. मैंने अपनी ज़िन्दगी में इतना प्यार शायद कभी किसी से नहीं किया था जितना दिव्या को करता था. हमारा कॉलेज ख़त्म हुआ, जॉब लग गयी और वो दिन आ गया जिस दिन हमने फैसला किया कि एक दूसरे क घरवालों को अपने रिश्ते के बारे में बताये. 1 दिसंबर 2018 का दिन था जब मैंने अपने घरवालों को दिव्या के बारे में बताया.

अम्मी अब्बू तो जैसे सदमे में चले गए थे. मैंने अपना पूरा दिल खोलकर उनके सामने रख दिया था लेकिन अब्बू तो मानने के लिए तैयार ही नहीं थे. वहीँ दिव्या के घरवाले भी इस रिश्ते के बिलकुल खिलाफ थे.

अब हम बड़ी दुविधा में फंसे हुए थे. हर पल बस यही सोचते थे कि घरवालों को निकाह के लिए कैसे राज़ी करवाया जाए. मैंने बहुत कोशिश की लेकिन ना तो अम्मी मानी और अब्बू तो बहुत ही ज़्यादा खिलाफ थे इस निकाह के.

हार कर मैंने दिव्या को घर छोड़ कर शादी करने के लिए कहा लेकिन एक लड़की के लिए ये बहुत मुश्किल होता है और मैं उसकी बात समझता था. इसलिए मैंने और दिव्या ने मिलकर ये फैसला किया कि हम दोनों अपने घरवालों की ख़ुशी के लिए अलग हो जाएंगे और हमने ये वादा किया कि अब एक दूसरे से कभी नहीं मिलेंगे.

हालांकि मुझे दिव्या से दूर हुए अभी 2 ही दिन हुए थे, मेरा दिल बहुत मचल रहा था. वो कहते है न जिसके साथ आपने पूरी ज़िन्दगी बिताने का फैसला किया हो, उसे भूलना इतना आसान नहीं होता साहब. बस दिव्या की बाते, उसका चेहरा, उसकी मुस्कराहट हर समय मुझे याद आती थी. लेकिन करता भी क्या, माँ बाप की इज़्ज़त और उनकी ज़िद्द के आगे मैं हार चूका था.

लेकिन 10 दिन के बाद मुझसे रहा ना गया और मैंने दिव्या की बेस्ट फ्रेंड, वैशाली को फ़ोन करके दिव्या का हालचाल पूछने की सोची, मुझे क्या पता था कि वो पल मेरी ज़िन्दगी में क़यामत बन कर आने वाला है.

मैंने दिव्या को फ़ोन किया और कहा “वैशाली…दिव्या…..” मेरा इतना ही कहना था कि वैशाली ने कहा “वैशाली, अब इस दुनिया में नहीं रही. आज शाम को उसका अंतिम संस्कार है, आखिरी बार उसे देखने ज़रूर जाना”

ये सुनकर जैसे मेरी पूरी ज़िन्दगी ही थम गयी थी और शायद आज भी थमी पड़ी है. सफ़ेद चादर में मैं दिव्या का चेहरा नहीं भूल पा रहा हूँ. मुझे वैशाली ने बताया कि “तुम्हारे बिना उससे ज़िन्दगी जीना एक बोझ लग रहा था और अपने माँ बाप के खिलाफ जाने की वो सोच भी नहीं सकती थी. उसे मरना ज़्यादा आसान लगा.”

ये सुन कर मैंने सोचा कि काश मैंने अपने दिल की सुनी होती और ले गया होता दिव्या को अपनी दुनिया में जहाँ सिर्फ वो और मैं होते लेकिन…. ये हो ना सका.

दिव्या की याद में मैं सिर्फ इतना कहूंगा …
बहुत उदास है कोई तेरे जाने से
हो सके तो लौट आ किसी बहाने से
तू चाहे जितनी दूर है लेकिन एक बार तो देख
कोई टूट गया तेरे जाने से
सच में…….तुम्हारे जाने के बाद तुम मुझमे कही ज़िंदा हो.

I Love You Divya and will Love You Forever.